NCERT Solutions for Class 10th Hindi Kshitij Chapter 2 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद
गोस्वामी तुलसीदास
पाठ्यपुस्तक पर आधारित प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? (CBSE 2015, 2017)
उत्तर: लक्ष्मण ने परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए निम्नलिखित तर्क दिए:
- हमने बचपन में खेल-खेल में ऐसे कई धनुष तोड़े थे, तब आपने कभी क्रोध नहीं किया।
- यह धनुष बहुत पुराना और कमज़ोर था, जो छूते ही टूट गया।
- हमारी नज़र में सभी धनुष एक समान होते हैं, इस विशेष धनुष पर इतना मोह क्यों?
- श्री राम ने इसे नया समझकर केवल छुआ था, इसमें उनका कोई दोष नहीं है।
प्रश्न 2. परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं, उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: राम और लक्ष्मण के स्वभाव एक-दूसरे से बिलकुल विपरीत हैं:
श्री राम: राम स्वभाव से कोमल, धैर्यवान और विनम्र हैं। वे क्रोधित परशुराम के सामने भी मर्यादा में रहते हैं और स्वयं को उनका ‘दास’ कहते हैं।
लक्ष्मण: लक्ष्मण उग्र, निडर और क्रोधी स्वभाव के हैं। वे व्यंग्य करने में चतुर हैं और अन्याय के विरुद्ध चुप रहना उन्हें स्वीकार नहीं है। वे अपनी तार्किक बातों से परशुराम को निरुत्तर कर देते हैं।
प्रश्न 3. लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।
उत्तर: मुझे निम्नलिखित संवाद अच्छा लगा –
लक्ष्मण: “मुनि जी! हमने बचपन में ऐसे बहुत से धनुष तोड़े हैं, तब तो आपने गुस्सा नहीं किया? इस पुराने धनुष से आपको इतना लगाव क्यों है?”
परशुराम: “अरे राजपुत्र! तू काल के वश में होकर बिना सोचे-समझे बोल रहा है। तू भगवान शिव के इस महान धनुष की तुलना साधारण धनुही से कर रहा है?”
लक्ष्मण: “हमारी समझ में तो सब धनुष एक जैसे हैं। राम जी ने तो इसे बस छुआ था और यह टूट गया। इसमें उनका क्या दोष?”
प्रश्न 4. परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पद्यांश के आधार पर लिखिए—
“बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही॥
भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही॥”
उत्तर: परशुराम ने अपनी प्रशंसा करते हुए सभा में कहा कि वे बाल-ब्रह्मचारी हैं और अत्यंत क्रोधी स्वभाव के हैं। वे पूरी दुनिया में क्षत्रिय कुल के विनाशक के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने अपनी भुजाओं के बल पर कई बार इस पृथ्वी को राजाओं से विहीन कर दिया और जीती हुई भूमि ब्राह्मणों को दान कर दी।
प्रश्न 5. लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताईं? (CBSE 2008, 2015, 2016)
उत्तर: लक्ष्मण के अनुसार एक सच्चे वीर योद्धा के निम्नलिखित गुण होते हैं:
- सच्चा वीर युद्ध के मैदान में वीरता दिखाता है, वह अपनी प्रशंसा स्वयं नहीं करता।
- वीर पुरुष धैर्यवान, शांत और गंभीर होते हैं, वे अपशब्दों या गालियों का प्रयोग नहीं करते।
- सच्चे वीर कभी भी गाय, ब्राह्मण, देवताओं और भक्तों पर अपनी शक्ति का प्रदर्शन नहीं करते, बल्कि उनका सम्मान करते हैं।
प्रश्न 6. “साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है।” इस कथन पर अपने विचार लिखिए। (CBSE 2016)
उत्तर: यह कथन पूर्णतः सत्य है क्योंकि साहस और शक्ति व्यक्ति को बलवान बनाते हैं, लेकिन विनम्रता उसे ‘इंसान’ बनाती है। यदि शक्ति के साथ विनम्रता न हो, तो व्यक्ति अहंकारी और अत्याचारी हो जाता है। विनम्रता कठिन परिस्थितियों को भी शांति से सुलझाने में मदद करती है। जैसे राम अपनी विनम्रता के कारण पूजनीय बने, जबकि परशुराम अपनी शक्ति के अहंकार में क्रोध के पात्र बने।
प्रश्न 7. भाव स्पष्ट कीजिए—
(क) बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी॥
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥
भाव: लक्ष्मण हँसकर कोमल वाणी में परशुराम पर व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि— “हे मुनिवर! आप तो स्वयं को बहुत बड़ा योद्धा मानते हैं। आप मुझे बार-बार अपना कुल्हाड़ा दिखाकर इस तरह डरा रहे हैं, मानो आप फूँक मारकर पहाड़ उड़ा देना चाहते हों।
(ख) इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥
देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना॥
भाव: लक्ष्मण कहते हैं कि यहाँ कोई ‘कुम्हड़बतिया’ (छुई-मुई का फल या बहुत कमज़ोर व्यक्ति) नहीं है, जो आपकी तर्जनी उँगली देखकर ही मुरझा जाए। मैंने तो आपके हाथ में धनुष-बाण और कुल्हाड़ा देखकर ही अभिमानपूर्वक कुछ कहा था क्योंकि मुझे लगा था कि सामने कोई वीर योद्धा खड़ा है।
(ग) गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरियरे सूझ।
अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ॥
भाव: यहाँ विश्वामित्र जी मन-ही-मन हँसकर सोचते हैं कि मुनि परशुराम को चारों ओर ‘हरा ही हरा’ सूझ रहा है (अर्थात वे राम-लक्ष्मण को साधारण क्षत्रिय समझ रहे हैं)। वे यह नहीं समझ पा रहे कि ये राजकुमार गन्ने से बनी खाँड़ नहीं, बल्कि लोहे से बनी तलवार (अयमय खाँड़) हैं।
प्रश्न 8. पाठ के आधार पर तुलसी की भाषा-सौंदर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए।
उत्तर:
1. तुलसीदास जी रचित यह अंश ‘रामचरितमानस’ के बालकांड से लिया गया है, जिसकी भाषा अवधी है।
2. इसमें चौपाई और दोहा शैली का सुंदर प्रयोग किया गया है, जो गेय (गाने योग्य) है।
3. भाषा में तत्सम शब्दों का प्रयोग उसे प्रभावशाली और गंभीर बनाता है।
4. मुहावरों और लोकोक्तियों के प्रयोग से भाषा में सजीवता आ गई है।
5. पूरी रचना में वीर रस और हास्य रस का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
6. लक्ष्मण के संवादों में व्यंग्य और वक्रोक्ति का प्रयोग अत्यंत कलात्मक है।
7. इसमें उपमा अलंकार (जैसे: कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा) का सटीक प्रयोग है।
8. अनुप्रास अलंकार की छटा पूरी रचना में ‘ब’ और ‘क’ वर्णों की आवृत्ति से दिखाई देती है।
9. उत्प्रेक्षा अलंकार (जैसे: तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा) भावों को गहराई देता है।
10. तुलसीदास जी ने कठोर शब्दों की जगह कोमल ध्वनियों का भी संतुलन बनाए रखा है, जिससे काव्य कर्णप्रिय लगता है।
प्रश्न 9. इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौंदर्य है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: यह पूरा प्रसंग व्यंग्य (Irony) से भरा है। लक्ष्मण, परशुराम के क्रोध को अपने तीखे व्यंग्य बाणों से और बढ़ा देते हैं।
उदाहरण 1: जब परशुराम धनुष तोड़ने वाले का वध करने की बात करते हैं, तो लक्ष्मण कहते हैं— “बहु धनुही तोरी लरिकाईं” (बचपन में हमने बहुत सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब तो आपको गुस्सा नहीं आया)।
उदाहरण 2: परशुराम को ‘महाभट’ (बड़ा योद्धा) कहना और यह कहना कि आप “फूँक से पहाड़ उड़ाना चाहते हैं”, उनकी वीरता पर सीधा कटाक्ष है।
उदाहरण 3: लक्ष्मण का यह कहना कि “आपने तो शास्त्र व्यर्थ ही धारण कर रखे हैं, आपके तो वचन ही करोड़ों वज्रों के समान हैं”, परशुराम के अहंकार को चोट पहुँचाता है।
प्रश्न 10. निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए—
(क) बालकु बोलि बधौँ नहि तोही।
उत्तर: अनुप्रास अलंकार (‘ब’ वर्ण की बार-बार आवृत्ति होने के कारण)।
(ख) कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।
उत्तर: उपमा अलंकार (यहाँ वचनों की तुलना ‘कुलिस’ यानी वज्र से की गई है और ‘सम’ वाचक शब्द का प्रयोग है)। साथ ही ‘क’ वर्ण की आवृत्ति से यहाँ अनुप्रास अलंकार भी है।
राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद पर आधारित अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न-
प्रश्न 1. लक्ष्मण ने धनुष टूटने के क्या तर्क दिए? (2015, 2017)
उत्तर: लक्ष्मण ने कहा कि उन्होंने बचपन में कई धनुहियाँ तोड़ी थीं। यह धनुष बहुत पुराना था जो श्री राम के छूते ही टूट गया। इसमें राम का कोई दोष नहीं है।
प्रश्न 2. राम और लक्ष्मण के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर: श्री राम स्वभाव से शांत, विनम्र और मर्यादित हैं, वे बड़ों का सम्मान करते हैं। इसके विपरीत लक्ष्मण उग्र और निडर हैं, जो अपनी बात व्यंग्य के माध्यम से निडरता से कहते हैं।
प्रश्न 3. परशुराम ने सभा में अपने बारे में क्या-क्या कहा?
उत्तर: सभा में परशुराम ने अपने बारे में निम्नलिखित बातें कहीं-
- परशुराम ने कहा कि वे बाल-ब्रह्मचारी और अत्यंत क्रोधी हैं।
- वे क्षत्रियों के घोर शत्रु हैं
- उन्होंने अपनी भुजाओं के बल पर कई बार पृथ्वी जीतकर ब्राह्मणों को दान दी है।
प्रश्न 4. लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या विशेषताएँ बताईं? (2008, 2015)
उत्तर: लक्ष्मण के अनुसार सच्चा वीर युद्ध में अपनी वीरता दिखाता है, डिंगें नहीं हांकता। वीर पुरुष धैर्यवान होते हैं और वे ब्राह्मण, देवता व गाय पर अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं करते।
प्रश्न 5. “साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है”—स्पष्ट कीजिए। (2016)
उत्तर: साहस और शक्ति व्यक्ति को वीर बनाते हैं, लेकिन विनम्रता उसे महान बनाती है। बिना विनम्रता के शक्ति अहंकार बन जाती है, जबकि विनम्रता कठिन परिस्थितियों को भी सरलता से सुलझा लेती है।
प्रश्न 6. परशुराम ने लक्ष्मण को किस कारण छोड़ दिया? (2016)
उत्तर: परशुराम ने लक्ष्मण को केवल ‘बालक’ समझकर और अपने मित्र विश्वामित्र के शील (स्वभाव) व उनके अनुरोध के कारण वध नहीं किया और अपना फरसा नीचे कर लिया।
प्रश्न 7. राम ने परशुराम को क्या कहकर संबोधित किया? (2016)
उत्तर: श्री राम ने परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए उन्हें ‘नाथ’ (स्वामी) कहकर संबोधित किया और स्वयं को उनका एक छोटा सा ‘दास’ (सेवक) बताया।
प्रश्न 8. परशुराम ने अपनी तुलना सहस्रबाहु से क्यों की? (2016)
उत्तर: परशुराम ने कहा कि जिसने भी शिव-धनुष तोड़ा है, वह उनका शत्रु है। जिस प्रकार उन्होंने सहस्रबाहु का वध किया था, वैसे ही वे धनुष तोड़ने वाले का भी वध कर देंगे।
प्रश्न 9. लक्ष्मण के किन तर्कों ने परशुराम के क्रोध को बढ़ाया? (2019)
उत्तर: लक्ष्मण ने परशुराम के धनुष-बाण को व्यर्थ बताया और उन्हें ‘फूँक से पहाड़ उड़ाने वाला’ कहा। उनके इन तीखे व्यंग्यों और निडर तर्कों ने परशुराम की क्रोध-अग्नि को और भड़का दिया।
प्रश्न 10. लक्ष्मण ने ‘कुम्हड़बतिया’ का उदाहरण क्यों दिया? (2020)
उत्तर: लक्ष्मण ने स्वयं को निर्भीक सिद्ध करने के लिए यह उदाहरण दिया। वे कहना चाहते थे कि वे कोई छुई-मुई का पौधा नहीं हैं जो परशुराम की उँगली दिखाने मात्र से डर जाएँगे।
प्रश्न 11. परशुराम का क्रोध अकारण क्यों नहीं था? (2020)
उत्तर: परशुराम शिव के परम भक्त थे। उनके गुरु का धनुष टूटना उनके लिए महान अपमान था। अतः गुरु के प्रति अटूट भक्ति के कारण उनका क्रोधित होना स्वाभाविक और सार्थक था।
प्रश्न 12. “अल्पवयस बालक बुजुर्गों को छेड़कर आनंदित होते हैं”— ‘राम-लक्ष्मण संवाद’ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (CBSE 2020)
उत्तर: नन्हे बालकों की यह स्वाभाविक प्रवृत्ति है कि वे बुजुर्गों को छेड़कर सुख पाते हैं। लक्ष्मण ने भी परशुराम की उग्रता और बड़बोलेपन को कम करने के बजाय अपने तीखे व्यंग्यों से उनके क्रोध को और अधिक बढ़ाकर इस संवाद को रोचक बना दिया।
प्रश्न 13. लक्ष्मण ने ‘कुम्हड़बतिया’ का दृष्टांत क्यों दिया है? इसके द्वारा वे मुनि और सभा को क्या संदेश देना चाहते हैं? (CBSE 2020)
उत्तर: लक्ष्मण ने अपनी वीरता और धीरता का परिचय देने के लिए यह दृष्टांत दिया। इसके माध्यम से वे संदेश देना चाहते थे कि वे कोई ‘छुई-मुई’ का पौधा नहीं हैं जो परशुराम के डर से मुरझा जाएँ। वे एक निर्भीक रणधीर योद्धा हैं।