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  • Download PDF of NCERT Solutions For Class 10 Hindi Kshitij Chapter 6 Sangatkar – 2025-26

    संगतकार

    भाग 1: पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

    प्रश्न 1. ‘संगतकार’ के माध्यम से कवि किस प्रकार के व्यक्तियों की ओर संकेत कर रहा है? (CBSE 2011, 2014)

    उत्तर: कवि उन सहायक कलाकारों की ओर संकेत कर रहा है जो मुख्य कलाकार की सफलता के पीछे रहकर अपनी प्रतिभा का योगदान देते हैं। वे अपना नाम और पहचान बनाने के बजाय मुख्य गायक को आगे रखते हैं।

    प्रश्न 2. संगतकार मुख्य गायक की सहायता किस प्रकार करते हैं? (CBSE 2012, 2015)

    उत्तर: संगतकार मुख्य गायक की सहायता इन तरीकों से करते हैं:

    • मुख्य गायक के स्वर को गूँज प्रदान कर उसे भारी और प्रभावशाली बनाते हैं।
    • गायक के भटकने पर ‘स्थायी’ (मुखड़े) को पकड़कर उसे वापस मूल स्वर पर लाते हैं।
    • गायक को यह अहसास दिलाते हैं कि वह अकेला नहीं है।

    प्रश्न 3. ‘भाव स्पष्ट कीजिए’—और उसकी आवाज़ में एक हिचक साफ़ सुनाई देती है या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है उसे उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए। (CBSE 2013)

    उत्तर: संगतकार मुख्य गायक के प्रति सम्मान के कारण अपना स्वर हमेशा नीचा रखता है। यह उसकी कमजोरी या योग्यता की कमी नहीं है, बल्कि यह उसका महान व्यक्तित्व और मानवता है कि वह खुद को पीछे रखकर मुख्य गायक को सफल बनाता है।

    प्रश्न 4. संगीत के अलावा अन्य किन-किन क्षेत्रों में संगतकार की भूमिका महत्वपूर्ण होती है? (CBSE 2016)

    उत्तर: संगीत के अलावा राजनीति, खेल, फिल्म निर्माण और चिकित्सा (ऑपरेशन के समय) जैसे क्षेत्रों में भी संगतकार की भूमिका अहम होती है। किसी भी टीम वर्क में लीडर की सफलता के पीछे सहायकों का बड़ा हाथ होता है।

    प्रश्न 5. संगतकार जैसे व्यक्ति संगीत के अलावा किन-किन क्षेत्रों में दिखाई देते हैं? (CBSE 2011, 2014)

    उत्तर: ये व्यक्ति खेल में टीम के खिलाड़ियों, राजनीति में कार्यकर्ताओं, फिल्म में सह-कलाकारों और सेना के सहायक सैनिकों के रूप में दिखाई देते हैं। वे पर्दे के पीछे रहकर मुख्य व्यक्ति की सफलता सुनिश्चित करते हैं।

    प्रश्न 6. किसी भी क्षेत्र में प्रसिद्धि पाने वाले लोगों को अनेक लोग तरह-तरह से अपना योगदान देते हैं। कोई एक उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए। (CBSE 2015)

    उत्तर: उदाहरण के तौर पर, एक क्रिकेट कप्तान की सफलता के पीछे उसके साथी खिलाड़ियों, कोच और सहायक स्टाफ का बड़ा योगदान होता है। इन सबके सहयोग के बिना कोई एक व्यक्ति महान नहीं बन सकता।

    प्रश्न 7. कभी-कभी तारसप्तक की ऊँचाई पर पहुँचकर मुख्य गायक का स्वर बिखरता नज़र आता है, उस समय संगतकार उसे कैसे सँभालता है? (CBSE 2012, 2014)

    उत्तर: तारसप्तक (ऊँचे स्वर) पर जब गायक का गला थकने लगता है, तब संगतकार पीछे से मूल स्वर को दुहराकर सहारा देता है। वह अपनी आवाज़ से गायक के टूटते उत्साह को फिर से जगा देता है।

    प्रश्न 8. (पूर्व में प्रश्न 10) सफलता के चरम शिखर पर पहुँचने के दौरान यदि व्यक्ति लड़खड़ाता है, तब उसे सहयोगी किस तरह सँभालते हैं? (CBSE 2016)

    उत्तर: सहयोगी व्यक्ति के मनोबल को गिरते समय बढ़ाते हैं। वे उसकी कमियों को ढक लेते हैं, उसे भावनात्मक संबल प्रदान करते हैं और शेष कार्यों को खुद पूरा करके उसे पुनः शिखर पर बने रहने में मदद करते हैं।

    भाग 2: अन्य महत्त्वपूर्ण परीक्षोपयोगी प्रश्न-उत्तर

    प्रश्न 1. संगतकार की मुख्य विशेषता क्या है? (CBSE 2012, 2019)

    उत्तर: संगतकार की सबसे बड़ी विशेषता उसका ‘त्याग’ और ‘समर्पण’ है। वह अपनी प्रतिभा को मुख्य गायक के स्वर के अधीन रखता है ताकि संगीत का प्रभाव बना रहे और गायक की प्रतिष्ठा कम न हो।

    प्रश्न 2. मुख्य गायक की आवाज़ कैसी होती है? (CBSE 2014)

    उत्तर: मुख्य गायक की आवाज़ भारी, गंभीर और शक्तिशाली होती है। उसमें एक अनुभवी चट्टान जैसा भारीपन होता है जो श्रोताओं को गहराई तक प्रभावित करता है।

    प्रश्न 3. संगतकार मुख्य गायक को क्या याद दिलाता है? (CBSE 2015)

    उत्तर: संगतकार उसे उसके बीते हुए समय और ‘नौसिखिया’ होने के दिनों की याद दिलाता है। वह उसे आभास कराता है कि अतीत की तरह ही वह आज भी अकेला नहीं है, संगतकार उसके साथ है।

    प्रश्न 4. ‘तारसप्तक’ क्या है और मुख्य गायक पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है? (CBSE 2013, 2018)

    उत्तर: तारसप्तक संगीत का ऊँचा स्वर है। इस पर गाते समय मुख्य गायक की आवाज़ बैठने लगती है, उसकी शक्ति जवाब देने लगती है और उसका उत्साह मंद पड़ जाता है।

    प्रश्न 5. संगतकार का स्वर कैसा बताया गया है? (CBSE 2011)

    उत्तर: संगतकार का स्वर कोमल, कमज़ोर और काँपता हुआ बताया गया है। वह मुख्य गायक के भारी स्वर के पीछे एक मीठी गूँज की तरह सुनाई देता है।

    प्रश्न 6. गायक के ‘अंतरे के जटिल जंगल’ में खो जाने का क्या आशय है? (CBSE 2017)

    उत्तर: इसका आशय है कि गायक जब गीत की कठिन तानों और बारीकियों में उलझ जाता है और अपनी लय खो देता है, तब वह अपनी ही गायकी के जंगल में भटक जाता है।

    प्रश्न 7. संगतकार अपनी मनुष्यता का परिचय किस प्रकार देता है? (CBSE 2020)

    उत्तर: वह जान-बूझकर अपने स्वर को मुख्य गायक से नीचा रखकर अपनी मनुष्यता दिखाता है। वह अपनी काबिलियत के प्रदर्शन से अधिक मुख्य कलाकार की साख बचाने की चिंता करता है

  • NCERT Solutions For Class 10 Hindi Kshitiz Chapter 6 यह दंतुरहित मुस्कान और फसल

    यह दंतुरित मुसकान (नागार्जुन)

    प्रश्न 1. बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है? (CBSE 2010, 2015)

    उत्तर: बच्चे की मुसकान देखकर कवि का निराश मन प्रसन्न हो उठता है। उन्हें ऐसा लगता है मानो उनकी पुरानी झोपड़ी में कमल खिल गए हों और पत्थर जैसा कठोर हृदय पिघलकर जल बन गया हो।

    प्रश्न 2. बच्चे की मुसकान और एक बड़े व्यक्ति की मुसकान में क्या अंतर है? (CBSE 2012, 2017)

    उत्तर: बच्चे की मुसकान निश्छल, स्वाभाविक और निस्वार्थ होती है, जो सबको आनंदित करती है। जबकि बड़ों की मुसकान अक्सर बनावटी, शिष्टाचार से भरी और परिस्थितियों के अनुसार बदली हुई होती है।

    प्रश्न 3. कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को किन-किन बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है? (CBSE 2014)

    उत्तर: कवि ने निम्नलिखित बिंबों का प्रयोग किया है:

     * झोपड़ी में कमल खिलना।

     * कठोर पत्थर का पिघलकर जल बनना।

     * बाँस और बबूल से शेफालिका के फूलों का झड़ना।

    प्रश्न 4. भाव स्पष्ट कीजिए: ‘छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात’ (CBSE 2016)

    उत्तर: इसका भाव यह है कि अभावों से भरी कवि की झोपड़ी बालक की मुसकान से जीवंत हो उठी है। कवि को अपना घर किसी पवित्र तालाब की तरह सुंदर और सुखद लगने लगा है।

    खंड 2: फसल (नागार्जुन)

    प्रश्न 1. कवि के अनुसार फसल क्या है? (CBSE 2010, 2018)

    उत्तर: फसल नदियों के पानी का जादू, मिट्टी के गुण-धर्म और सूरज की किरणों व हवा का रूपांतरण है। यह मुख्य रूप से करोड़ों किसानों के कठिन परिश्रम का गौरवशाली परिणाम है।

    प्रश्न 2. कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई है, वे कौन-कौन से हैं? (CBSE 2013, 2019)

    उत्तर: फसल के लिए आवश्यक तत्व निम्नलिखित हैं:

     * नदियों का पानी और मिट्टी के पोषक तत्व।

     * सूरज का प्रकाश और हवा का वेग।

     * किसानों और मज़दूरों के हाथों का श्रम।

    प्रश्न 3. फसल को ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा’ और ‘महिमा’ कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है? (CBSE 2015, 2020)

    उत्तर: कवि कहना चाहता है कि फसल केवल प्रकृति की देन नहीं है। इसमें किसान का पसीना और मेहनत शामिल है। मानवीय श्रम ही वह तत्व है जो प्रकृति को अनाज में बदलता है।

    प्रश्न 4. भाव स्पष्ट कीजिए: ‘रूपांतर है सूरज की किरणों का, सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का’ (CBSE 2017)

    उत्तर: फसल सूर्य की ऊर्जा का भौतिक रूप है। यह सूरज की किरणों को सोखकर और हवा के स्पर्श से विकसित होती है। प्रकृति की ये शक्तियाँ फसल के रूप में हमारे सामने आती हैं।

    खंड 3: अन्य महत्त्वपूर्ण परीक्षोपयोगी प्रश्न-उत्तर

    प्रश्न 1. ‘यह दंतुरित मुसकान’ कविता में ‘मधुपर्क’ शब्द का क्या आशय है? (CBSE 2014, 2016)

    उत्तर: मधुपर्क का अर्थ माँ द्वारा बच्चे को कराए जाने वाले आत्मीय पालन-पोषण और स्नेह से है। यह माँ का ममतामयी स्पर्श है जिसने बच्चे को दुनिया से परिचित कराया है।

    प्रश्न 2. “फसल” कविता हमें किसके करीब ले जाती है? (CBSE 2015)

    उत्तर: यह कविता हमें उपभोक्तावादी संस्कृति से बचाकर कृषि-संस्कृति और मिट्टी के करीब ले जाती है। यह हमें प्रकृति और मनुष्य के आपसी सहयोग और कठिन परिश्रम का महत्व समझाती है।

    प्रश्न 3. कवि ने बच्चे को ‘अनिमेष’ देखते रहने का क्या कारण बताया है? (CBSE 2013)

    उत्तर: कवि लंबे समय बाद घर लौटे थे, इसलिए बच्चा उन्हें पहचान नहीं पा रहा था। वह अजनबी को अपनी बड़ी आँखों से जिज्ञासा और हैरानी के साथ बिना पलक झपकाए देख रहा था।

    प्रश्न 4. ‘मिट्टी का गुण-धर्म’ से कवि का क्या तात्पर्य है? (CBSE 2011, 2019)

    उत्तर: हर मिट्टी की अपनी उपजाऊ शक्ति और विशेषता होती है। फसल में उसी मिट्टी के पोषक तत्व समाहित होते हैं। मिट्टी का गुण-धर्म ही फसल के स्वाद और रूप को निर्धारित करता है।

    प्रश्न 5. माँ की भूमिका को ‘यह दंतुरित मुसकान’ में किस प्रकार सराहा गया है? (CBSE 2018)

    उत्तर: माँ ही वह माध्यम है जिसने कवि और बच्चे का परिचय कराया। माँ की ममता और देखभाल के कारण ही बच्चे की मुसकान में वह आकर्षण और जीवन का संचार हुआ है।

    प्रश्न 6. ‘फसल’ कविता में नदियों के पानी को ‘जादू’ क्यों कहा गया है? (CBSE 2012)

    उत्तर: पानी बेजान बीज में अंकुर फोड़कर उसे जीवन प्रदान करता है। नदियों का जल सिंचाई के माध्यम से मिट्टी को उपजाऊ बनाता है, जिससे फसल लहलहाती है। यह किसी जादू जैसा ही है।

    प्रश्न 7. “धन्य तुम, माँ भी तुम्हारी धन्य”—कवि ने ऐसा क्यों कहा है? (CBSE 2020)

    उत्तर: कवि ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि बच्चा अत्यंत सुंदर है और माँ ने उसे ममता से पाला है। कवि स्वयं को प्रवासी मानकर उन दोनों के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त करता है।

  • NCERT Solutions For Class 10 Hindi Kshitiz Chapter 5 उत्साह और अट नहीं रही

    उत्साह

    पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

    खंड 1: ‘उत्साह’ कविता

    प्रश्न 1. कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए कहता है, क्यों?

    उत्तर: कवि बादलों को क्रांति का सूत्रधार मानता है। वह उनसे पौरुष दिखाने की कामना करता है, इसलिए ताप और दुखों को दूर करने के लिए वह क्रांतिकारी शक्ति के रूप में उन्हें गरजने के लिए बुलाता है।

    प्रश्न 2. कविता का शीर्षक ‘उत्साह’ क्यों रखा गया है?

    उत्तर: कविता का शीर्षक ‘उत्साह’ इसलिए है क्योंकि यह बादलों की गर्जन और उमड़न-घुमड़न से मेल खाता है। बादलों में भीषण गति होती है जिससे कवि धरती के ताप हरने वाली शक्ति और भावना चाहता है।

    प्रश्न 3. कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है?

    उत्तर: कविता में बादल तीन अर्थों की ओर संकेत करता है: जल बरसाने वाली शक्ति के रूप में, उत्साह और संघर्ष के भाव भरने वाले कवि के रूप में तथा पीड़ाओं का ताप हरने वाली सुखकारी शक्ति के रूप में।

    प्रश्न 4. ‘उत्साह’ कविता में ‘नाद-सौंदर्य’ वाले शब्द छाँटकर लिखिए।

    उत्तर: शब्दों का ऐसा प्रयोग जो ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा करे, नाद-सौंदर्य कहलाता है। कविता में ‘घेर घेर घोर गगन’ और ‘ललित ललित, काले घुँघराले’ जैसे शब्दों में नाद-सौंदर्य स्पष्ट रूप से मौजूद है।

    खंड 2: ‘अट नहीं रही है’ कविता

    प्रश्न 1. छायावाद की एक खास विशेषता है अंतर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: यहाँ फागुन की शोभा और मानव-मन की उमंग एक हो गए हैं। ‘कहीं साँस लेते हो’, ‘घर-घर भर देते हो’ जैसी पंक्तियाँ फागुन के वैभव और मनुष्य की खुशी के बीच गहरा सामंजस्य व्यक्त करती हैं।

    प्रश्न 2. कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है ?

    उत्तर: फागुन का सौंदर्य अत्यंत मतवाला, मस्त और शोभाशाली है। चारों ओर रंग-बिरंगे फूलों, पत्तों और सुहावने मौसम के कारण वातावरण इतना आकर्षक हो गया है कि कवि का मन उस पर से आँख हटाने को नहीं करता।

    प्रश्न 3. कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है?

    उत्तर: कवि ने प्रकृति के सौंदर्य को किसी एक दृश्य में नहीं बाँधा है। फूलों का खिलना, मादक हवाओं का चलना, पक्षियों का उड़ना और हर घर में फैली शोभा प्रकृति की असीम व्यापकता और विस्तार की झलक देती है।

    प्रश्न 4. फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है?

    उत्तर: फागुन में वातावरण अत्यंत मीठा और सुहावना होता है। धरती पर सर्वाधिक फूल खिलते हैं, आसमान साफ होता है और वृक्षों पर नए लाल-हरे पत्ते आते हैं। ऐसी मादकता और सुंदरता अन्य महीनों में नहीं होती।

    प्रश्न 5. इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ लिखिए।

    उत्तर: निराला के काव्य-शिल्प की प्रमुख विशेषता प्रकृति-चित्रण द्वारा मन के भावों को प्रकट करना है। छायावादी शिल्प के अनुरूप उन्होंने मानवीयकरण अलंकार, प्रतीकात्मकता और नाद-सौंदर्य का अत्यंत कुशल प्रयोग किया है।

    भाग 3: अन्य महत्त्वपूर्ण परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

    प्रश्न 1. ‘उत्साह’ कविता में सुंदर कल्पना और क्रांति-चेतना दोनों हैं, कैसे?

    उत्तर: बादलों को ‘काले घुँघराले बालों’ वाले बालक की सुंदर कल्पना कहा गया है। साथ ही, बादलों के ‘गर्जन-तर्जन’ और उनके भीतर छिपी ‘वज्र’ जैसी शक्ति में क्रांति की चेतना समाहित है।

    प्रश्न 2. कवि निराला ने बादलों को “बाल-कल्पना के से काले” क्यों कहा है?

    उत्तर: बादलों का रूप-आकार बालकों के काले और घुँघराले बालों के समान दिखाई देता है। बादलों के इस सघन और मनमोहक घनघोर रूप को दिखाने के लिए कवि ने यह उपमा दी है।

    प्रश्न 3. ‘उत्साह’ कविता में निराला के जीवन की झलक कैसे मिलती है?

    उत्तर: निराला का जीवन भी जोश, सौंदर्य और पौरुष से भरा था। जिस प्रकार बादल ओजस्वी हैं और नई सृष्टि का निर्माण करते हैं, उसी प्रकार कवि का जीवन और उनका साहित्य भी उत्साह का प्रतीक है।

    प्रश्न 4. “उड़ने को नभ में तुम पर-पर कर देते हो” का आशय स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: फागुन के आते ही वातावरण में ऐसी मादकता छा जाती है कि पक्षी पंख फड़फड़ाकर ऊँचे आसमान में उड़ने लगते हैं। यह दृश्य मनुष्य के मन में भी उत्साह और उमंग भर देता है।

    प्रश्न 5. “पत्तों से लदी डाल, कहीं हरी, कहीं लाल” में किस ऋतु का वर्णन है?

    उत्तर: इसमें फागुन मास और वसंत ऋतु का सुंदर वर्णन है। भाव यह है कि वसंत में वृक्षों की डालियाँ नए पत्तों से लद जाती हैं, जिनमें कुछ हरे हैं और कुछ नए कोमल लाल पत्ते हैं।

    प्रश्न 6. फागुन की मस्ती का मानव-मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

    उत्तर: फागुन की मस्ती के कारण मानव-मन नाच उठता है और उसमें भी आकाश में उड़ने की उमंग जागती है। प्रकृति की असीम शोभा देखकर मनुष्य अपनी आँखें बंद नहीं करना चाहता और मंत्रमुग्ध रहता है।

    प्रश्न 7. फागुन मास की ऋतु का नाम और उसकी प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

    उत्तर: फागुन मास में वसंत ऋतु होती है। इस समय आसमान साफ होता है, शीतल हवाएँ चलती हैं, वृक्षों पर नए पत्ते-फूल आते हैं और चारों ओर अद्भुत मादकता व मस्ती छाई रहती है।

    प्रश्न 8. ‘उत्साह’ कविता में ‘नवजीवन वाले’ किसे और क्यों कहा गया है?

    उत्तर: यह विशेषण बादलों और कवि दोनों के लिए है। बादल वर्षा करके प्यासी धरती में नया जीवन फूँकते हैं, जबकि कवि अपनी उत्साहपूर्ण कविताओं से हताश लोगों के जीवन में नई उमंग भरता है।

    प्रश्न 9. ‘अट नहीं रही है’ कविता का क्या संदेश है?

    उत्तर: इस कविता का संदेश प्रकृति के उल्लास को प्रकट करना और जीवन को नए रंग व उमंग से भर देना है। यह मनुष्य के भावों में उत्साह भरकर सकारात्मकता का संचार करती है।

    प्रश्न 10. ‘उत्साह’ कविता में कवि ने बादल के किन रूपों की चर्चा की है ?

    उत्तर: उत्साह कविता में कवि ने बादलों के तीन रूप बताए हैं:

    1. कल्पनाओं के समान सुंदर और घुमड़ते बादल ।
    2. नई चेतना व वज्र-शक्ति से भरपूर क्रांतिकारी बादल ।
    3. प्यासी धरती पर जल बरसाने वाले सुखकारी बादल।

    प्रश्न 11. प्रकृति की शोभा फागुन में कैसे अपना रंग-रूप बदलती है?

    उत्तर: फागुन में प्रकृति नित्य नया श्रृंगार करती है। सुगंधित हवाएँ चलती हैं, रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं और वृक्षों पर नए फल-फूल आने से पूरी धरती का रूप अत्यंत वैभवशाली और मनमोहक हो जाता है।

    प्रश्न 12. यदि ‘उत्साह’ कविता को कोई अन्य शीर्षक देना हो तो क्या देंगे और क्यों?

    उत्तर: इसका अन्य शीर्षक ’बादल गरजो’ हो सकता है। क्योंकि यह पूरी कविता बादलों को संबोधित है और कवि बादलों की गर्जन के माध्यम से समाज में क्रांति और उत्साह का आह्वान करना चाहता है।

  • NCERT Solutions For Class 10th (X) Hindi Kshitiz Chapter 4 आत्मकथ्य

    CBSE Class 10 Hindi Chapter 3 “Atmakathya”

    पाठ्यपुस्तक के प्रश्न-अभ्यास

    प्रश्न 1. कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहता है? (CBSE)

    उत्तर: कवि को लगता है कि उनके जीवन में कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। वे अपनी व्यक्तिगत असफलताओं और निजी दुखों को सार्वजनिक कर अपना मज़ाक नहीं उड़वाना चाहते, इसलिए वे इससे बचना चाहते हैं।

    प्रश्न 2. आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में ‘अभी समय भी नहीं’ कवि ऐसा क्यों कहता है? (CBSE)

    उत्तर: कवि के अनुसार उनके जीवन के दुख और व्यथाएँ अभी शांत हैं। वे उन्हें भूलने की कोशिश कर रहे हैं। आत्मकथा लिखकर वे उन सोए हुए दुखों को फिर से कुरेदना नहीं चाहते।

    प्रश्न 3. स्मृति को ‘पाथेय’ बनाने से कवि का क्या आशय है? (CBSE)

    उत्तर: ‘पाथेय’ का अर्थ है यात्रा का सहारा। कवि का जीवन दुखों से भरा रहा है, अब केवल पुरानी मधुर यादें ही उनके जीने का सहारा हैं। उन्हीं यादों के बल पर वे शेष जीवन काटना चाहते हैं।

    प्रश्न 4. भाव स्पष्ट कीजिए: ‘मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।’

    उत्तर: कवि कहना चाहते हैं कि उन्होंने जीवन में जिस सुख की कल्पना की थी, वह उन्हें कभी प्राप्त नहीं हुआ। सुख उनकी बाँहों में आने से पहले ही मुस्कुराकर दूर भाग गया अर्थात उनका प्रेम अधूरा रह गया।

    प्रश्न 5. ‘उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की’—कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

    उत्तर: कवि का तात्पर्य है कि उनकी प्रेयसी के साथ बिताए गए प्रेम के क्षण अत्यंत निजी और पवित्र हैं। वे उन मधुर यादों को सबके सामने प्रकट कर उनका प्रदर्शन नहीं करना चाहते।

    प्रश्न 6. ‘आत्मकथ्य’ कविता की काव्य-भाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

    उत्तर: कविता की भाषा संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली है। इसमें छायावादी शैली की प्रतीकात्मकता है (जैसे ‘रीति गागर’)। मानवीयकरण और अनुप्रास अलंकारों के प्रयोग से भाषा अत्यंत प्रभावशाली और गेय बन गई है।

    प्रश्न 7. कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था, उसे कविता में किस रूप में अभिव्यक्त किया है?

    उत्तर: कवि ने सुख को एक मधुर स्वप्न के रूप में दिखाया है जहाँ वे अपनी प्रेयसी को आलिंगन में लेते हैं। उसकी सुंदरता ऊषा की लाली जैसी थी, लेकिन वह सुख क्षणिक था और जल्द ही दूर हो गया।

    भाग 2: अन्य महत्त्वपूर्ण परीक्षोपयोगी प्रश्नोत्तर

    प्रश्न 1. ‘आत्मकथ्य’ कविता में कवि क्या कहना चाहता है? (Imp.)

    उत्तर: कवि स्वयं को एक सामान्य मनुष्य मानते हुए अपनी कमियों और असफलताओं को स्वीकार करते हैं। वे कहना चाहते हैं कि उनका जीवन दुखों से भरा है और वे दूसरों की गाथाएँ सुनना अधिक पसंद करते हैं।

    प्रश्न 2. कवि मधुर चाँदनी रातों की उज्ज्वल गाथाएँ क्यों नहीं गाना चाहता?

    उत्तर: कवि मधुर यादों को अपनी निजी संपत्ति मानते हैं। उन पर केवल कवि का अधिकार है। वे उन सुखद स्मृतियों को दुनिया को बताकर अपनी निजता को भंग नहीं करना चाहते।

    प्रश्न 3. ‘भोली आत्मकथा’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है? (Imp.)

    उत्तर: इसका अर्थ है कि कवि का जीवन छल-कपट से दूर सरल रहा है। उन्होंने अपनों से धोखा खाया है, पर स्वयं कभी किसी का बुरा नहीं किया। इसी निष्कपटता के कारण वे इसे ‘भोली’ कहते हैं।

    प्रश्न 4. कविता के आधार पर कवि की प्रेयसी के सौंदर्य का चित्रण कीजिए। (Imp.)

    उत्तर: कवि की प्रेमिका अपार सुंदर थी। उसके गालों की लालिमा इतनी मोहक थी कि सुबह की सूर्य की लाली भी उसके सामने फीकी लगती थी। उसका व्यक्तित्व अत्यंत हँसमुख और मन को भाने वाला था।

    प्रश्न 5. ‘आत्मकथ्य’ कविता की विशेषताएँ लिखिए। (CBSE)

    उत्तर: यह कविता कवि की विनम्रता और सहजता को दर्शाती है। इसकी भाषा सरल खड़ी बोली है जिसमें मानवीयकरण और संवाद शैली का सुंदर प्रयोग है। इसमें कवि ने अपनी हार को भी साहस के साथ स्वीकारा है।

  • NCERT Solutions For Class 10th Hindi Kshitij Chapter 2 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

    NCERT Solutions For Class 10th Hindi Kshitij Chapter 2 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

    NCERT Solutions for Class 10th Hindi Kshitij Chapter 2 राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

    राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

    गोस्वामी तुलसीदास

    पाठ्यपुस्तक पर आधारित प्रश्नोत्तर

    प्रश्न 1. परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? (CBSE 2015, 2017)

    उत्तर: लक्ष्मण ने परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए निम्नलिखित तर्क दिए:

    • हमने बचपन में खेल-खेल में ऐसे कई धनुष तोड़े थे, तब आपने कभी क्रोध नहीं किया।
    • यह धनुष बहुत पुराना और कमज़ोर था, जो छूते ही टूट गया।
    • हमारी नज़र में सभी धनुष एक समान होते हैं, इस विशेष धनुष पर इतना मोह क्यों?
    • श्री राम ने इसे नया समझकर केवल छुआ था, इसमें उनका कोई दोष नहीं है।

    प्रश्न 2. परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं, उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।

    उत्तर: राम और लक्ष्मण के स्वभाव एक-दूसरे से बिलकुल विपरीत हैं:

    श्री राम: राम स्वभाव से कोमल, धैर्यवान और विनम्र हैं। वे क्रोधित परशुराम के सामने भी मर्यादा में रहते हैं और स्वयं को उनका ‘दास’ कहते हैं।

    लक्ष्मण: लक्ष्मण उग्र, निडर और क्रोधी स्वभाव के हैं। वे व्यंग्य करने में चतुर हैं और अन्याय के विरुद्ध चुप रहना उन्हें स्वीकार नहीं है। वे अपनी तार्किक बातों से परशुराम को निरुत्तर कर देते हैं।

    प्रश्न 3. लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।

    उत्तर: मुझे निम्नलिखित संवाद अच्छा लगा –

     लक्ष्मण: “मुनि जी! हमने बचपन में ऐसे बहुत से धनुष तोड़े हैं, तब तो आपने गुस्सा नहीं किया? इस पुराने धनुष से आपको इतना लगाव क्यों है?”

     परशुराम: “अरे राजपुत्र! तू काल के वश में होकर बिना सोचे-समझे बोल रहा है। तू भगवान शिव के इस महान धनुष की तुलना साधारण धनुही से कर रहा है?”

     लक्ष्मण: “हमारी समझ में तो सब धनुष एक जैसे हैं। राम जी ने तो इसे बस छुआ था और यह टूट गया। इसमें उनका क्या दोष?”

    प्रश्न 4. परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पद्यांश के आधार पर लिखिए—

    “बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही॥

    भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही॥”

    उत्तर: परशुराम ने अपनी प्रशंसा करते हुए सभा में कहा कि वे बाल-ब्रह्मचारी हैं और अत्यंत क्रोधी स्वभाव के हैं। वे पूरी दुनिया में क्षत्रिय कुल के विनाशक के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने अपनी भुजाओं के बल पर कई बार इस पृथ्वी को राजाओं से विहीन कर दिया और जीती हुई भूमि ब्राह्मणों को दान कर दी।

    प्रश्न 5. लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताईं? (CBSE 2008, 2015, 2016)

    उत्तर: लक्ष्मण के अनुसार एक सच्चे वीर योद्धा के निम्नलिखित गुण होते हैं:

    • सच्चा वीर युद्ध के मैदान में वीरता दिखाता है, वह अपनी प्रशंसा स्वयं नहीं करता।
    • वीर पुरुष धैर्यवान, शांत और गंभीर होते हैं, वे अपशब्दों या गालियों का प्रयोग नहीं करते।
    • सच्चे वीर कभी भी गाय, ब्राह्मण, देवताओं और भक्तों पर अपनी शक्ति का प्रदर्शन नहीं करते, बल्कि उनका सम्मान करते हैं।

    प्रश्न 6. “साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है।” इस कथन पर अपने विचार लिखिए। (CBSE 2016)

    उत्तर: यह कथन पूर्णतः सत्य है क्योंकि साहस और शक्ति व्यक्ति को बलवान बनाते हैं, लेकिन विनम्रता उसे ‘इंसान’ बनाती है। यदि शक्ति के साथ विनम्रता न हो, तो व्यक्ति अहंकारी और अत्याचारी हो जाता है। विनम्रता कठिन परिस्थितियों को भी शांति से सुलझाने में मदद करती है। जैसे राम अपनी विनम्रता के कारण पूजनीय बने, जबकि परशुराम अपनी शक्ति के अहंकार में क्रोध के पात्र बने।

    प्रश्न 7. भाव स्पष्ट कीजिए—

    (क) बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी॥

    पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू॥

    भाव: लक्ष्मण हँसकर कोमल वाणी में परशुराम पर व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि— “हे मुनिवर! आप तो स्वयं को बहुत बड़ा योद्धा मानते हैं। आप मुझे बार-बार अपना कुल्हाड़ा दिखाकर इस तरह डरा रहे हैं, मानो आप फूँक मारकर पहाड़ उड़ा देना चाहते हों।

    (ख) इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥

    देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना॥

    भाव: लक्ष्मण कहते हैं कि यहाँ कोई ‘कुम्हड़बतिया’ (छुई-मुई का फल या बहुत कमज़ोर व्यक्ति) नहीं है, जो आपकी तर्जनी उँगली देखकर ही मुरझा जाए। मैंने तो आपके हाथ में धनुष-बाण और कुल्हाड़ा देखकर ही अभिमानपूर्वक कुछ कहा था क्योंकि मुझे लगा था कि सामने कोई वीर योद्धा खड़ा है।

    (ग) गाधिसूनु कह हृदयँ हँसि मुनिहि हरियरे सूझ।

    अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ॥

    भाव: यहाँ विश्वामित्र जी मन-ही-मन हँसकर सोचते हैं कि मुनि परशुराम को चारों ओर ‘हरा ही हरा’ सूझ रहा है (अर्थात वे राम-लक्ष्मण को साधारण क्षत्रिय समझ रहे हैं)। वे यह नहीं समझ पा रहे कि ये राजकुमार गन्ने से बनी खाँड़ नहीं, बल्कि लोहे से बनी तलवार (अयमय खाँड़) हैं।

    प्रश्न 8. पाठ के आधार पर तुलसी की भाषा-सौंदर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए।

    उत्तर:

     1. तुलसीदास जी रचित यह अंश ‘रामचरितमानस’ के बालकांड से लिया गया है, जिसकी भाषा अवधी है।

     2. इसमें चौपाई और दोहा शैली का सुंदर प्रयोग किया गया है, जो गेय (गाने योग्य) है।

     3. भाषा में तत्सम शब्दों का प्रयोग उसे प्रभावशाली और गंभीर बनाता है।

     4. मुहावरों और लोकोक्तियों के प्रयोग से भाषा में सजीवता आ गई है।

     5. पूरी रचना में वीर रस और हास्य रस का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

     6. लक्ष्मण के संवादों में व्यंग्य और वक्रोक्ति का प्रयोग अत्यंत कलात्मक है।

     7. इसमें उपमा अलंकार (जैसे: कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा) का सटीक प्रयोग है।

     8. अनुप्रास अलंकार की छटा पूरी रचना में ‘ब’ और ‘क’ वर्णों की आवृत्ति से दिखाई देती है।

     9. उत्प्रेक्षा अलंकार (जैसे: तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा) भावों को गहराई देता है।

     10. तुलसीदास जी ने कठोर शब्दों की जगह कोमल ध्वनियों का भी संतुलन बनाए रखा है, जिससे काव्य कर्णप्रिय लगता है।

    प्रश्न 9. इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौंदर्य है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: यह पूरा प्रसंग व्यंग्य (Irony) से भरा है। लक्ष्मण, परशुराम के क्रोध को अपने तीखे व्यंग्य बाणों से और बढ़ा देते हैं।

     उदाहरण 1: जब परशुराम धनुष तोड़ने वाले का वध करने की बात करते हैं, तो लक्ष्मण कहते हैं— “बहु धनुही तोरी लरिकाईं” (बचपन में हमने बहुत सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब तो आपको गुस्सा नहीं आया)।

     उदाहरण 2: परशुराम को ‘महाभट’ (बड़ा योद्धा) कहना और यह कहना कि आप “फूँक से पहाड़ उड़ाना चाहते हैं”, उनकी वीरता पर सीधा कटाक्ष है।

     उदाहरण 3: लक्ष्मण का यह कहना कि “आपने तो शास्त्र व्यर्थ ही धारण कर रखे हैं, आपके तो वचन ही करोड़ों वज्रों के समान हैं”, परशुराम के अहंकार को चोट पहुँचाता है।

    प्रश्न 10. निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए—

    (क) बालकु बोलि बधौँ नहि तोही।

    उत्तर: अनुप्रास अलंकार (‘ब’ वर्ण की बार-बार आवृत्ति होने के कारण)।

    (ख) कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।

    उत्तर: उपमा अलंकार (यहाँ वचनों की तुलना ‘कुलिस’ यानी वज्र से की गई है और ‘सम’ वाचक शब्द का प्रयोग है)। साथ ही ‘क’ वर्ण की आवृत्ति से यहाँ अनुप्रास अलंकार भी है।

    राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद पर आधारित अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न-

    प्रश्न 1. लक्ष्मण ने धनुष टूटने के क्या तर्क दिए? (2015, 2017)

    उत्तर: लक्ष्मण ने कहा कि उन्होंने बचपन में कई धनुहियाँ तोड़ी थीं। यह धनुष बहुत पुराना था जो श्री राम के छूते ही टूट गया। इसमें राम का कोई दोष नहीं है।

    प्रश्न 2. राम और लक्ष्मण के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।

    उत्तर: श्री राम स्वभाव से शांत, विनम्र और मर्यादित हैं, वे बड़ों का सम्मान करते हैं। इसके विपरीत लक्ष्मण उग्र और निडर हैं, जो अपनी बात व्यंग्य के माध्यम से निडरता से कहते हैं।

    प्रश्न 3. परशुराम ने सभा में अपने बारे में क्या-क्या कहा?

    उत्तर: सभा में परशुराम ने अपने बारे में निम्नलिखित बातें कहीं-

    • परशुराम ने कहा कि वे बाल-ब्रह्मचारी और अत्यंत क्रोधी हैं।
    • वे क्षत्रियों के घोर शत्रु हैं
    • उन्होंने अपनी भुजाओं के बल पर कई बार पृथ्वी जीतकर ब्राह्मणों को दान दी है।

    प्रश्न 4. लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या विशेषताएँ बताईं? (2008, 2015)

    उत्तर: लक्ष्मण के अनुसार सच्चा वीर युद्ध में अपनी वीरता दिखाता है, डिंगें नहीं हांकता। वीर पुरुष धैर्यवान होते हैं और वे ब्राह्मण, देवता व गाय पर अपनी शक्ति का प्रयोग नहीं करते।

    प्रश्न 5. “साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है”—स्पष्ट कीजिए। (2016)

    उत्तर: साहस और शक्ति व्यक्ति को वीर बनाते हैं, लेकिन विनम्रता उसे महान बनाती है। बिना विनम्रता के शक्ति अहंकार बन जाती है, जबकि विनम्रता कठिन परिस्थितियों को भी सरलता से सुलझा लेती है।

    प्रश्न 6. परशुराम ने लक्ष्मण को किस कारण छोड़ दिया? (2016)

    उत्तर: परशुराम ने लक्ष्मण को केवल ‘बालक’ समझकर और अपने मित्र विश्वामित्र के शील (स्वभाव) व उनके अनुरोध के कारण वध नहीं किया और अपना फरसा नीचे कर लिया।

    प्रश्न 7. राम ने परशुराम को क्या कहकर संबोधित किया? (2016)

    उत्तर: श्री राम ने परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए उन्हें ‘नाथ’ (स्वामी) कहकर संबोधित किया और स्वयं को उनका एक छोटा सा ‘दास’ (सेवक) बताया।

    प्रश्न 8. परशुराम ने अपनी तुलना सहस्रबाहु से क्यों की? (2016)

    उत्तर: परशुराम ने कहा कि जिसने भी शिव-धनुष तोड़ा है, वह उनका शत्रु है। जिस प्रकार उन्होंने सहस्रबाहु का वध किया था, वैसे ही वे धनुष तोड़ने वाले का भी वध कर देंगे।

    प्रश्न 9. लक्ष्मण के किन तर्कों ने परशुराम के क्रोध को बढ़ाया? (2019)

    उत्तर: लक्ष्मण ने परशुराम के धनुष-बाण को व्यर्थ बताया और उन्हें ‘फूँक से पहाड़ उड़ाने वाला’ कहा। उनके इन तीखे व्यंग्यों और निडर तर्कों ने परशुराम की क्रोध-अग्नि को और भड़का दिया।

    प्रश्न 10. लक्ष्मण ने ‘कुम्हड़बतिया’ का उदाहरण क्यों दिया? (2020)

    उत्तर: लक्ष्मण ने स्वयं को निर्भीक सिद्ध करने के लिए यह उदाहरण दिया। वे कहना चाहते थे कि वे कोई छुई-मुई का पौधा नहीं हैं जो परशुराम की उँगली दिखाने मात्र से डर जाएँगे।

    प्रश्न 11. परशुराम का क्रोध अकारण क्यों नहीं था? (2020)

    उत्तर: परशुराम शिव के परम भक्त थे। उनके गुरु का धनुष टूटना उनके लिए महान अपमान था। अतः गुरु के प्रति अटूट भक्ति के कारण उनका क्रोधित होना स्वाभाविक और सार्थक था।

    प्रश्न 12. “अल्पवयस बालक बुजुर्गों को छेड़कर आनंदित होते हैं”— ‘राम-लक्ष्मण संवाद’ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (CBSE 2020)

    उत्तर: नन्हे बालकों की यह स्वाभाविक प्रवृत्ति है कि वे बुजुर्गों को छेड़कर सुख पाते हैं। लक्ष्मण ने भी परशुराम की उग्रता और बड़बोलेपन को कम करने के बजाय अपने तीखे व्यंग्यों से उनके क्रोध को और अधिक बढ़ाकर इस संवाद को रोचक बना दिया।

    प्रश्न 13. लक्ष्मण ने ‘कुम्हड़बतिया’ का दृष्टांत क्यों दिया है? इसके द्वारा वे मुनि और सभा को क्या संदेश देना चाहते हैं? (CBSE 2020)

    उत्तर: लक्ष्मण ने अपनी वीरता और धीरता का परिचय देने के लिए यह दृष्टांत दिया। इसके माध्यम से वे संदेश देना चाहते थे कि वे कोई ‘छुई-मुई’ का पौधा नहीं हैं जो परशुराम के डर से मुरझा जाएँ। वे एक निर्भीक रणधीर योद्धा हैं।

  • Class 10 Hindi: बालगोबिन भगत – पाठ का सारांश और प्रश्न-उत्तर”

    Class 10 Hindi: बालगोबिन भगत – पाठ का सारांश और प्रश्न-उत्तर”

    प्रश्न 1. बालगोबिन भगत अपनी किन विशेषताओं के कारण साधु कहलाते थे?(CBSE-2008,2010,2017)

    उत्तर: वे गृहस्थ होकर भी साधु थे क्योंकि:

     1. वे सदैव सत्य बोलते थे।

     2. किसी से अनावश्यक झगड़ा नहीं करते थे।

     3. किसी की वस्तु बिना पूछे नहीं छूते थे।

     4. अपनी उपज पहले कबीरपंथी मठ में अर्पित करते थे।

     5. वे मोह-माया से मुक्त और सात्विक थे।

    प्रश्न 2. भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी? (CBSE-2010,2019)

    उत्तर: पुत्र की मृत्यु के बाद भगत अकेले रह गए थे। पुत्रवधू उनकी वृद्धावस्था में सेवा, भोजन और बीमारी में दवा-दारू का प्रबंध करने के लिए उन्हें नहीं छोड़ना चाहती थी।

    प्रश्न 3. भगत ने बेटे की मृत्यु पर भावनाएँ कैसे व्यक्त कीं ?

    उत्तर: उन्होंने विलाप के बजाय उत्सव मनाया। वे कबीर के पद गाते रहे और कहा कि आत्मा का परमात्मा से मिलन हो गया है, जो खुशी की बात है।

    प्रश्न 4. भगत के व्यक्तित्व और वेशभूषा का चित्रण कीजिए

    उत्तर: उनका व्यक्तित्व और पहनावा इस प्रकार था:

     1. वे साठ वर्ष से ऊपर के मंझोले कद के गोरे व्यक्ति थे।

     2. सिर पर कबीरपंथी टोपी और कमर में लंगोटी पहनते थे।

     3. माथे पर रामानंदी चंदन और गले में तुलसी की माला रहती थी।

    प्रश्न 5. बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी ?

    उत्तर: उनकी अटूट नियम-निष्ठा अचरज जगाती थी। वे भीषण सर्दी में भी भोर में उठकर दूर नदी स्नान करने जाते और उपवास रखकर मीलों पैदल चलते थे।

    प्रश्न 6. बालगोबिन भगत के मधुर गायन की विशेषताएँ लिखिए।

    उत्तर: उनके गायन की विशेषताएँ:

     1. स्वर में जादुई प्रभाव और आकर्षण था।

     2. सुनते ही बच्चे झूमने लगते और खेतों में काम करने वालों के पैर थिरकने लगते।

     3. उनका गायन उमस भरी शाम में शीतलता भर देता था।

    प्रश्न 7. भगत किन प्रसंगों के कारण सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे ?

    उत्तर: उन्होंने बेटे की चिता को आग अपनी पुत्रवधू से दिलवाई और समाज के विपरीत जाकर विधवा पुत्रवधू के दूसरे विवाह का आदेश दिया।

    प्रश्न 8. धान की रोपाई के समय माहौल कैसा होता था?

    उत्तर: भगत के गीतों से सारा वातावरण संगीतयमय हो जाता था। स्त्रियाँ गीत गुनगुनाने लगती थीं और हलवाहों व मजदूरों की उंगलियाँ एक निश्चित लय में चलने लगती थीं।

    रचना और अभिव्यक्ति

    प्रश्न 9. बालगोबिन भगत की कबीर पर श्रद्धा किन रूपों में प्रकट हुई है ? (CBSE- 2010,2018)

    उत्तर: उनकी श्रद्धा इन रूपों में दिखी:

     1. वे कबीर को ‘साहब’ मानते और उनके पदों को गाते थे।

     2. अपनी उपज पहले कबीरपंथी मठ में भेंट करते थे।

     3. कबीर के समान सादा जीवन और शुद्ध आचरण रखते थे।

     4. सामाजिक कुरीतियों का विरोध कर कबीर के आदर्शों पर चले।

    प्रश्न 10. आपकी दृष्टि में भगत की कबीर पर अगाध श्रद्धा के क्या कारण रहे होंगे ? (CBSE)

    उत्तर: कबीर की स्पष्टवादिता, सादगी और आडंबरहीन भक्ति ने उनके सरल किसान हृदय को छुआ होगा। उन्हें कबीर के विचारों में जीवन की सच्चाई और ईश्वर के प्रति निस्वार्थ प्रेम दिखाई दिया होगा।

    प्रश्न 11. गाँव का सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश आषाढ़ चढ़ते ही उल्लास से क्यों भर जाता है ?

    उत्तर: आषाढ़ में वर्षा होते ही धान की रोपाई शुरू होती है। खेतों में बच्चों की उछल-कूद, औरतों का गीत गुनगुनाना और कीचड़ में सने किसानों का संगीत की लय पर काम करना वातावरण को खुशनुमा बना देता है।

    प्रश्न 12. ‘साधु’ की पहचान आप किन आधारों पर सुनिश्चित करेंगे ?

    उत्तर: साधु की पहचान पहनावे से नहीं, बल्कि इन आधारों पर होनी चाहिए:

     1. व्यवहार में सच्चाई और सादगी हो।

     2. परोपकार की भावना और निस्वार्थ जीवन हो।

     3. मन में किसी के प्रति द्वेष या मोह न हो।

     4. सात्विक और मर्यादित आचरण हो।

    प्रश्न 13. मोह और प्रेम में अंतर को भगत ने किस घटना से सिद्ध किया ? (CBSE- 2015)

    उत्तर: भगत ने अपनी पुत्रवधू को खुद की सेवा के लिए घर में नहीं रोका (जो मोह होता), बल्कि उसके सुखद भविष्य के लिए उसका दूसरा विवाह करवाया। यह निस्वार्थ कदम ‘प्रेम’ का सच्चा प्रतीक था।

    अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

    प्रश्न 1. बालगोबिन भगत पाठ में किन सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार किया गया है? [CBSE 2019]

    उत्तर: पाठ में मुख्य रूप से इन रूढ़ियों पर चोट की गई है:

     1. विधवा-विवाह का विरोध।

     2. मृत देह को मुखाग्नि केवल पुरुष (पुत्र) द्वारा देना।

     3. मृत्यु पर शोक मनाना।

    प्रश्न 2. लेखक की दृष्टि में भगत की मौत उनके अनुरूप हुई। सिद्ध कीजिए। [CBSE 2014]

    उत्तर: भगत का जीवन पवित्र और अनुशासित था। अपनी मृत्यु के दिन तक उन्होंने अपनी नियम-निष्ठा, गंगा-स्नान और भजन नहीं छोड़ा। वे गाते-गाते शांत हुए, जो उनके सात्विक जीवन के अनुरूप ही था।

    प्रश्न 3. यह पाठ किस विधा में है और कौन-सी लोक-संस्कृति दर्शाता है? [CBSE 2015]

    उत्तर:

    1. यह पाठ रेखाचित्र (संस्मरण) विधा में है।

    2. इसमें ग्रामीण लोक-संस्कृति को दर्शाया गया है, जहाँ सामूहिक खेती, आपसी प्रेम और भक्ति संगीत का    महत्व है।

    प्रश्न 4. पतोहू अपने भाई के साथ जाने को तैयार क्यों नहीं थी? [CBSE 2012, 2019]

    उत्तर: पतोहू को अपने ससुर (भगत जी) के प्रति अगाध श्रद्धा थी। वह जानती थी कि उनके बुढ़ापे में भोजन बनाने और बीमारी में दवा देने वाला कोई नहीं है।

    प्रश्न 5. उमस भरी शाम को भगत किस प्रकार शीतल कर देते थे? [CBSE 2012, 2020]

    उत्तर: गर्मियों की शाम को भगत अपने प्रेमपूर्ण भजनों और खँजड़ी की ताल से ऐसा जादुई वातावरण बनाते थे कि भक्तों का मन और शरीर भक्ति की शीतलता से भर जाता था।

    प्रश्न 6. भगत के जीवन की कौन-सी बातों ने आपको प्रभावित किया और क्यों? [CBSE 2012]

    उत्तर: मुझे इन बातों ने प्रभावित किया:

     1. सामाजिक कुरीतियों का साहसपूर्ण विरोध।

     2. सुख-दुख में समान भाव (पुत्र की मृत्यु पर भी उत्सव) ।

     3. उनकी अटूट कर्तव्यनिष्ठा और सादगी।

    प्रश्न 7. पुष्टि कीजिए कि भगत सच्चे कबीरपंथी थे। [CBSE 2020]

    उत्तर: वे कबीरपंथी थे क्योंकि:

     1. वे कबीर को ‘साहब’ मानते थे।

     2. कभी झूठ नहीं बोलते थे और आचरण में खरापन रखते थे।

     3. वे बाहरी आडंबरों के विरोधी और सादगी पसंद थे।

    प्रश्न 8. भगत अपनी सब चीजें ‘साहब’ की मानते थे- उदाहरण दीजिए। [CBSE 2020]

    उत्तर: 1. वे खेत की पूरी पैदावार पहले कबीर-मठ ले जाते थे।

    2. वहां से प्रसाद स्वरूप जो मिलता, उसी से गुजारा करते थे।

    3. वे अपने शरीर और संतान को भी ईश्वर की अमानत मानते थे।

    प्रश्न 9. “भगत और पतोहू एक-दूसरे की हित-चिंता में जिद पर अड़े थे”- स्पष्ट कीजिए। [CBSE 2020]

    उत्तर: भगत चाहते थे कि पतोहू पुनर्विवाह कर सुखी जीवन बिताए, जबकि पतोहू भगत की वृद्धावस्था में सेवा के लिए घर नहीं छोड़ना चाहती थी। दोनों का स्वार्थ नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति प्रेम था।

  • कक्षा 10 हिंदी – अध्याय 1: पद (सूरदास) प्रश्न-उत्तर

    कक्षा 10 हिंदी – अध्याय 1: पद (सूरदास) प्रश्न-उत्तर

    प्रश्न 1. गोपियों द्वारा उद्धव को ‘भाग्यवान’ कहने में क्या व्यंग्य निहित है? (CBSE 2021)

    उत्तर: गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहना वास्तव में एक कटाक्ष (व्यंग्य) है। उनका अर्थ है कि उद्धव बहुत अभागे हैं क्योंकि वे कृष्ण के साथ रहकर भी उनके प्रेम के बंधन में नहीं बँध सके और न ही कभी प्रेम के सुख का अनुभव कर पाए।

    प्रश्न 2. उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है?(CBSE 2015)

    उत्तर: उद्धव के व्यवहार की तुलना दो चीजों से की गई है:

    1. कमल के पत्ते से: जो पानी में रहकर भी गीला नहीं होता।

    2. तेल की मटकी से: जिसे पानी में डुबोने पर भी उस पर पानी की एक बूंद नहीं ठहरती। (अर्थात उद्धव कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम से अछूते रहे।)

    प्रश्न 3. गोपियों ने किन-किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने (शिकायत) दिए हैं? (CBSE 2019)

    उत्तर: गोपियों ने निम्नलिखित तर्कों के साथ उद्धव को उलाहने दिए हैं:

    1. मन की बात: गोपियों के मन की प्रेम भावनाएँ कृष्ण के न आने के कारण मन में ही रह गईं।
    2. विश्वासघात: आने की उम्मीद जगाकर कृष्ण ने योग-संदेश भेजकर गोपियों के साथ छल किया है।
    3. मर्यादा त्याग: कृष्ण ने प्रेम के बदले योग भेजकर प्रेम की सच्ची मर्यादा को तोड़ दिया है।

    प्रश्न 4. उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम कैसे किया?

    उत्तर: गोपियाँ इस उम्मीद में बैठी थीं कि कृष्ण एक दिन वापस आएंगे और उनका दुख दूर होगा। लेकिन जब उद्धव ने उन्हें कृष्ण को भूलकर योग साधना करने का उपदेश दिया, तो उनकी उम्मीद टूट गई और उनका विरह (बिछड़ने का दुख) आग की तरह भड़क उठा।

    प्रश्न 5. ‘मरजादा न लही’ के माध्यम से कौन-सी मर्यादा न रहने की बात की जा रही है? (CBSE 2012)

    उत्तर: यहाँ प्रेम की मर्यादा की बात की जा रही है। प्रेम की मर्यादा है कि बदले में प्रेम ही दिया जाए, लेकिन कृष्ण ने गोपियों के प्रेम के बदले उन्हें ‘योग संदेश’ भेज दिया।

    प्रश्न 6. कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को गोपियों ने किस प्रकार अभिव्यक्त किया है? (CBSE 2015, 2017)

    उत्तर: गोपियों ने अपने प्रेम को इन उदाहरणों से व्यक्त किया है:

    1. वे कृष्ण के प्रेम में वैसे ही चिपकी हैं जैसे गुड़ से चींटियाँ चिपकी रहती हैं।
    2. वे खुद को हारिल पक्षी की तरह मानती हैं, जिसने कृष्ण नाम की लकड़ी को मजबूती से पकड़ रखा है।
    3. वे सोते-जागते, दिन-रात केवल कृष्ण का ही नाम रटती रहती हैं।

    प्रश्न 7. गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने की बात कही है?

    उत्तर: गोपियों के अनुसार योग की शिक्षा उन लोगों को दी जानी चाहिए जिनका मन स्थिर नहीं है और जिनके हृदय में कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम की कमी है (जिनका मन चकरी की तरह भटकता रहता है)।

    प्रश्न 8. गोपियों का योग-साधना के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट करें।

    उत्तर: गोपियाँ योग-साधना को नीरस, व्यर्थ और ‘कड़वी ककड़ी’ के समान अरुचिकर मानती हैं। उनके लिए कृष्ण-प्रेम ही सर्वोपरि है और योग उस प्रेम मार्ग में एक बाधा या बीमारी की तरह है।

    प्रश्न 9. गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए?

    उत्तर: गोपियों के अनुसार राजा का धर्म अपनी प्रजा की रक्षा करना और उन्हें अन्याय व कष्टों से बचाना होना चाहिए। राजा को अपनी प्रजा को सताना नहीं चाहिए।

    प्रश्न 10. गोपियों को कृष्ण में कौन-से परिवर्तन दिखाई दिए जिनके कारण वे अपना मन वापस पा लेने की बात कहती हैं?

    उत्तर: गोपियों को लगा कि कृष्ण अब राजनीतिज्ञ हो गए हैं और छल-कपट का सहारा लेने लगे हैं। उनके व्यवहार में प्रेम की जगह चतुराई आ गई है, इसलिए वे अब कृष्ण से अपना मन वापस माँगती हैं।

    प्रश्न 11. गोपियों के वाक्चातुर्य की विशेषताएँ लिखिए।

    उत्तर: गोपियाँ तर्क करने में कुशल हैं। वे अपने व्यंग्य और निश्छल प्रेम के बल पर ज्ञानी उद्धव को भी निरुत्तर कर देती हैं। उनके शब्दों में गहरी भावुकता और सामने वाले को परास्त करने की गजब की क्षमता है।

    प्रश्न 12. सूर के ‘भ्रमरगीत’ की मुख्य विशेषताएँ बताइए।

    उत्तर:

    1. इसमें गोपियों का कृष्ण के प्रति अनन्य और निश्छल प्रेम प्रकट हुआ है।
    2. निर्गुण भक्ति पर सगुण भक्ति की विजय दिखाई गई है (योग पर प्रेम की जीत)।
    3. इसमें उपालंभ (उलाहना), तीखे व्यंग्य और कटाक्ष की प्रधानता है।