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  • कक्षा 10 हिंदी – अध्याय 1: पद (सूरदास) प्रश्न-उत्तर

    कक्षा 10 हिंदी – अध्याय 1: पद (सूरदास) प्रश्न-उत्तर

    प्रश्न 1. गोपियों द्वारा उद्धव को ‘भाग्यवान’ कहने में क्या व्यंग्य निहित है? (CBSE 2021)

    उत्तर: गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहना वास्तव में एक कटाक्ष (व्यंग्य) है। उनका अर्थ है कि उद्धव बहुत अभागे हैं क्योंकि वे कृष्ण के साथ रहकर भी उनके प्रेम के बंधन में नहीं बँध सके और न ही कभी प्रेम के सुख का अनुभव कर पाए।

    प्रश्न 2. उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है?(CBSE 2015)

    उत्तर: उद्धव के व्यवहार की तुलना दो चीजों से की गई है:

    1. कमल के पत्ते से: जो पानी में रहकर भी गीला नहीं होता।

    2. तेल की मटकी से: जिसे पानी में डुबोने पर भी उस पर पानी की एक बूंद नहीं ठहरती। (अर्थात उद्धव कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम से अछूते रहे।)

    प्रश्न 3. गोपियों ने किन-किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने (शिकायत) दिए हैं? (CBSE 2019)

    उत्तर: गोपियों ने निम्नलिखित तर्कों के साथ उद्धव को उलाहने दिए हैं:

    1. मन की बात: गोपियों के मन की प्रेम भावनाएँ कृष्ण के न आने के कारण मन में ही रह गईं।
    2. विश्वासघात: आने की उम्मीद जगाकर कृष्ण ने योग-संदेश भेजकर गोपियों के साथ छल किया है।
    3. मर्यादा त्याग: कृष्ण ने प्रेम के बदले योग भेजकर प्रेम की सच्ची मर्यादा को तोड़ दिया है।

    प्रश्न 4. उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम कैसे किया?

    उत्तर: गोपियाँ इस उम्मीद में बैठी थीं कि कृष्ण एक दिन वापस आएंगे और उनका दुख दूर होगा। लेकिन जब उद्धव ने उन्हें कृष्ण को भूलकर योग साधना करने का उपदेश दिया, तो उनकी उम्मीद टूट गई और उनका विरह (बिछड़ने का दुख) आग की तरह भड़क उठा।

    प्रश्न 5. ‘मरजादा न लही’ के माध्यम से कौन-सी मर्यादा न रहने की बात की जा रही है? (CBSE 2012)

    उत्तर: यहाँ प्रेम की मर्यादा की बात की जा रही है। प्रेम की मर्यादा है कि बदले में प्रेम ही दिया जाए, लेकिन कृष्ण ने गोपियों के प्रेम के बदले उन्हें ‘योग संदेश’ भेज दिया।

    प्रश्न 6. कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को गोपियों ने किस प्रकार अभिव्यक्त किया है? (CBSE 2015, 2017)

    उत्तर: गोपियों ने अपने प्रेम को इन उदाहरणों से व्यक्त किया है:

    1. वे कृष्ण के प्रेम में वैसे ही चिपकी हैं जैसे गुड़ से चींटियाँ चिपकी रहती हैं।
    2. वे खुद को हारिल पक्षी की तरह मानती हैं, जिसने कृष्ण नाम की लकड़ी को मजबूती से पकड़ रखा है।
    3. वे सोते-जागते, दिन-रात केवल कृष्ण का ही नाम रटती रहती हैं।

    प्रश्न 7. गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने की बात कही है?

    उत्तर: गोपियों के अनुसार योग की शिक्षा उन लोगों को दी जानी चाहिए जिनका मन स्थिर नहीं है और जिनके हृदय में कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम की कमी है (जिनका मन चकरी की तरह भटकता रहता है)।

    प्रश्न 8. गोपियों का योग-साधना के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट करें।

    उत्तर: गोपियाँ योग-साधना को नीरस, व्यर्थ और ‘कड़वी ककड़ी’ के समान अरुचिकर मानती हैं। उनके लिए कृष्ण-प्रेम ही सर्वोपरि है और योग उस प्रेम मार्ग में एक बाधा या बीमारी की तरह है।

    प्रश्न 9. गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए?

    उत्तर: गोपियों के अनुसार राजा का धर्म अपनी प्रजा की रक्षा करना और उन्हें अन्याय व कष्टों से बचाना होना चाहिए। राजा को अपनी प्रजा को सताना नहीं चाहिए।

    प्रश्न 10. गोपियों को कृष्ण में कौन-से परिवर्तन दिखाई दिए जिनके कारण वे अपना मन वापस पा लेने की बात कहती हैं?

    उत्तर: गोपियों को लगा कि कृष्ण अब राजनीतिज्ञ हो गए हैं और छल-कपट का सहारा लेने लगे हैं। उनके व्यवहार में प्रेम की जगह चतुराई आ गई है, इसलिए वे अब कृष्ण से अपना मन वापस माँगती हैं।

    प्रश्न 11. गोपियों के वाक्चातुर्य की विशेषताएँ लिखिए।

    उत्तर: गोपियाँ तर्क करने में कुशल हैं। वे अपने व्यंग्य और निश्छल प्रेम के बल पर ज्ञानी उद्धव को भी निरुत्तर कर देती हैं। उनके शब्दों में गहरी भावुकता और सामने वाले को परास्त करने की गजब की क्षमता है।

    प्रश्न 12. सूर के ‘भ्रमरगीत’ की मुख्य विशेषताएँ बताइए।

    उत्तर:

    1. इसमें गोपियों का कृष्ण के प्रति अनन्य और निश्छल प्रेम प्रकट हुआ है।
    2. निर्गुण भक्ति पर सगुण भक्ति की विजय दिखाई गई है (योग पर प्रेम की जीत)।
    3. इसमें उपालंभ (उलाहना), तीखे व्यंग्य और कटाक्ष की प्रधानता है।